जानिये सावन महीने का महत्व और भगवान शिव को क्यों प्रिय है सावन महीना

हिन्दू धर्म में सावन महीने का बहुत महत्व माना जाता है। सावन महीने में की गयी पूजा दोगुना फल देने वाली होती है। इस महीने में रखे गए सोमवार के व्रत 16 सोमवार के व्रत के समान माने जाते हैं। इस साल सावन का महीना हिन्दू पंचांग के अनुसार 25 जुलाई से शुरू होकर 22 अगस्त तक चलेगा। ये महीना भगवान शिव को प्रिय होने के कारन समस्त मनोकामनाओं को पूरा करने वाला होता है।

ऋषि मारकंडे ने सावन के महीने किया था अमरत्व प्राप्त


बाल ऋषि कहे जाने वाले ऋषि मारकंडे ने सावन के महीने ही भगवान शिव की पूजा कर उनसे लम्बी उम्र का वरदान प्राप्त किया था। ऋषि मारकंडे ने इसी महीने महामृत्युंजय मंत्र को सिद्ध कर भगवान शिव को प्रसन्न किया था जिससे मृत्यु के देवता यमराज को भी ऋषि मारकंडे की भक्ति के आगे हार माननी पड़ी थी। इस महीने किया गया महामृत्युंजय मंत्र का जाप अधिक फल देने वाला होता है।

सावन के महीने भगवान शिव आते हैं अपने ससुराल


ऐसी मान्यता है की भगवान् शिव इसी महीने अपने ससुराल राजा हिमवान के घर हिमालय में आते हैं। पहली बार अपने ससुराल आने पर भगवान् शिव का स्वागत जलाभिषेक और अर्घ्य देकर किया गया था। पृथ्वीलोक के वासियों के लिए ये महीना शिव की कृपा पाने वाला माना जाता है।

सावन के महीने पड़ा था महादेव का नाम नीलकंठ


कहा जाता है की सावन के महीने ही देवताओं और असुरों की सहायता से समुद्र मंथन किया गया था। समुद्र मंथन में हलाहल विष निकलने पर सभी देवता और दैत्य पीछे हट गए थे। समस्त संसार को हलाहल से बचाने के लिए महादेव ही आगे आये थे और उस विष को ग्रहण कर उसे अपने कंठ में रखा था। विष अपने कंठ में रखने के कारन भगवान् शिव का गला नीला पड़ गया था, जिस कारण भगवान् शिव का नीलकंठ नाम पड़ा। विष की तपश को कम करने के लिए सभी देवताओं ने भगवान् शिव को भांग और जल अर्पित किया था। इसी कारन भगवान् शिव को जल और कच्ची लस्सी अर्पित की जाती है, ऐसा करने करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ती होती है।

माता पार्वती ने सावन के महीने ही किया था भगवान् शिव को प्राप्त


पुराणों के अनुसार माता पार्वती ने भगवान् शिव को प्राप्त करने के लिए सतयुग में राजा हिमाचल के घर कन्या के रूप में जन्म लिया था। भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए माता ने सावन के महीने ही तपस्या की थी। तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान् शिव ने माता पार्वती से विवाह किया था। इसी कारन इस महीने मंगला गौरी का व्रत भी रखा जाता है। यह व्रत सावन के मंगलवार को सुहागिनों द्वारा माता पारवती के लिए रखा जाता है। घोर तपस्या करने के कारण माता पार्वती का ब्रह्मचारिणी नाम पड़ा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *