कृष्ण राधा का विवाह क्यों नहीं हो पाया, जानिए उसके पीछे की कथा

जब कभी भी दुनिया में प्यार और प्रेमियों की बात होती है तो सबसे पहला भगवान श्रीकृष्ण और राधा का नाम लिया जाता है। दोनों का प्यार सदियों-सदियों तक अमर हो गया है। भले ही दोनों ने एक दूसरे से शादी नहीं फिर भी लोग इन दोनों को एक नाम के साथ बुलाते हैं राधेकृष्ण यानि के राधा के कृष्ण। लेकिन एक दूसरे को प्यार करने के बावजूद इन दोनों ने एक दूसरे से शादी क्यों नहीं की। आईए आपको हम अपने इस लेख में बताते हैं कि आखिर क्यों राधा और कृष्ण ने एक दूसरे शादी नहीं की।

अगर हम शास्त्रों का अध्ययन करें तो हमें इन दोनों को संबंध में कई ऐसी काथाएं और प्रचलित कहानियां मिल जाती है। कई जगहों पर राधा को श्रीकृष्ण का ही रूप माना गया है। तो कहीं यह भी लिखा गया है कि भले ही दोनों ने शादी नहीं की हो लेकिन वह कभी अलग ही नहीं हुए। राधा हमेशा कृष्ण के दिल में रहीं हैं और कृष्ण भी राधा के मन से कभी नहीं निकले।

 

पुराणिक कथाओं के अनुसार राधा श्रीकृष्ण से आयु में 5 वर्ष बड़ी थी। इन दोनों की पहली मुलाकात भी बड़ी रोचक थी। जब राधा ने श्रीकृष्ण को पहली बार देखा था तो मैय्या यशोदा ने उन्हें शरारत करने के कारण बांध रखा था। वहीं कुछ जगहों पर यह भी लिखा है कि राधा ने कृष्ण को पहली बार अपने पिता वृषाभानुजी के साथ देखा। उस समय राधा कृष्ण को देखकर उन पर मोहित हो गई। वहीं कृष्ण भी राधा की सुंदरता को देखते ही रह गए।

कृष्ण और राधा को एक दूसरे का साथ अच्छा लगता था। जब कृष्ण गाय को चराने के लिए जाया करते थे तो उनके साथ राधा और अन्य मित्र भी मौजूद होते थे। कृष्ण को बांसुरी बजाना पसंद था और जब भी कृष्ण बांसुरी बजाते तो राधा बेसुध होकर नाचने लगती। कृष्ण को राधा का नृत्य का काफी अच्छी लगता था। लेकिन जैसे ही राधा और कृष्ण के प्रेम का पता गांव वालों को चला तो इस पर गांव में जोरों से चर्चा होने लगी।

वहीं एक कथा के अनुसार राधा का घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। वहीं कृष्ण राधा से प्रेम तो करते ही थे लेकिन एक दिन उन्होंने अपनी माता यशोदा से कहा कि वह राधा से शादी करना चाहते हैं। माता यशोदा ने कृष्ण को यह करते हुए इंकार कर दिया कि राधा तुमसे आयु में बड़ी है और उसकी मंगनी पहले से ही हो चुकी है। इसी कारण तुम राधा से विवाह नहीं कर सकते। लेकिन भला कृष्ण मैय्या यशोदा के इतना कहने पर कैसे हटने वाले थे हठी जो ठहरे हमारा कृष्ण।

 

मैय्या यशोदा ने कृष्ण के इस हठ को नंद को बताया। नंद ने भी कृष्ण की इस बात को इंकार कर दिया और उन्हें ऋषि गर्ग के पास ले गए। जब कृष्ण को ऋषि गर्ग के पास ले जाया गया तो ऋषि ने उन्हें समझाया कि तुम्हारे जीवन का उद्देश्य यह नहीं है कृष्ण। तुम्हारा अवतार इस सृष्टि में धर्म की स्थापना करने के लिए हुआ है। लेकिन ऋषि की बात सुनने के बाद कृष्ण कहते हैं कि मुझे नहीं करना है संसार पालनहार।

कृष्ण ने ऋषि से कहा कि मैं यहां ही इन ग्वालों में नदियों पहाड़ों के बीच रहकर ही खुश हूं। अगर मुझे धर्म ही स्थापित करना है तो मै इसकी शुरूआत यहीं से करूंगा। तब कृष्ण ने ऋषि से सवाल किया क्या मैं जिससे प्रेम करता हूं उसे छोड़ दूं? क्या यह न्याय होगा? इस पर ऋषि उन्हें समझाते हुए उन्हें सच बता देतें हैं कि वह देवकी और वासुदेव के पुत्र हैं।

इस पर कृष्ण एक दम शांत हो जाते हैं और ऋषि से अपनी जीवन के बारे में और पूछना शुरू कर देते हैं। उन्होंने कहा कि कृष्ण तुमने अपने सभी रूपों को पहचान लिया है और तुम ही वही महापुरुष हो जो इस संसार में एक धर्म की स्थापना करेगा। यह सुनकर कृष्ण उठकर गोवर्धन पर्वत की ओर चले जाते हैं। वहां वह पूरा दिन आत्म मंथन करते हैं और जहां से उनका जीवन बदल जाता है। इस कारण वह राधा से शादी करने की जिद्द छोड़ देते हैं।

वहीं राधा एक कथा के अनुसार राधा का विवाह करा दिया गया था। उनका विवाह कृष्ण से नहीं बल्कि जावत गांव में एक गोपी थी जिसके पुत्र का नाम अभिमन्यु था, उससे राधा का विवाह हुआ था। वहीं कृष्ण का विवाह रुक्मिणि, सत्यभामा और जामवंती से हुआ था। भले ही दोनों के विवाह अलग-अलग हुए हों लेकिन आज भी राधेकृष्ण को ही पूजा जाता है।

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