जब भीम ने भगवान हनुमान को युद्ध के लिए कहा, भगवान ने इस तरह तोड़ा भीम का अंहकार

महाकाव्य महाभारत में कई पात्र हैं और उनकी कई कथाएं देखने को मिलती हैं। उसी कथा में से एक पौराणिक कथा है भगवान हनुमान और पांडव पुत्र भीम की। भीम जो कि मल युद्ध और गदा युद्ध में काफी परागंत थे। उन्होंने कई बार कौरवों को अपने इस बल से युद्ध और खेल में हराया। लेकिन भीम को अपनी भुजाओं और गदा युद्ध पर अभिमान हो गया था। जिस कारण भगवान हनुमान जी ने उन्हें सही दिशा में लाने और भीम का अंहकार तोड़ने के लिए अपनी लीला दिखाई।

यह पौराणिक कथा उस समय की है जब पांडवों को वनवास भोगना पड़ा था। पांडवों को 13 साल तक अज्ञातवात में रहने के लिए कहा गया था। इस कारण पांडवों ने अपनी वेशभूषा बदलकर वन में रहे। पांडवों के साथ उनकी पत्नी द्रोपदी भी उनके साथ ही रहीं। जहां-जहां पांडव जाते वहां-वहां द्रोपदी भी जाती। एक दिन द्रोपदी को प्यास लगी और उन्होंने भीम को पानी लाने के लिए कहा। भीम पानी ढूंढने के लिए चल पड़े। भीम ने इसके साथ ही लकड़िया ले जाना भी सोचा।

भगवान हनुमान ने वृद्ध वानर का रूप धारण किया

भीम जब पानी और लकड़ी ढूंढने के लिए वन में भटक रहे थे तभी उस वन में एक वृद्ध वानर वृक्ष के नीचे आराम कर रहा था। भीम के उसी मार्ग से आगे बढ़ना था। रास्ते में वृ्ध वानर को सोया हुआ देख भीम ने उसे कहा कि वह उसके मार्ग से हट जाए। लेकिन वानर के रूप में सोए हनुमान जी ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। लेकिन भीम ने एक बार फिर एक बार वानर से कहा कि वह उनके मार्ग से हट जाए। लेकिन वृद्ध वानर ने फिर से अनसुना कर दिया।

जब भीम को हनुमान जी पर क्रोध आ गया

भीम अब अपनी शालीनत खो रहे थे। उन्होंने वद्ध वानर से कहा कि वह उनके मार्ग से हट जाए। लेकिन इस बार वानर ने भीम को उत्तर देते हुए कहा कि वह वृद्ध हो चुका है और उससे उठा नहीं जा रहा है। इसलिए वह उन्हें लांघ कर चला जाए। वानर के इतना कहने पर ही भीम क्रोधित हो उठे। भीम ने तुरंत वानर को कहा कि वह कुंती पुत्र भीम है। पवनदेव उनके पिता हैं। इसलिए वह उनका मार्ग छोड़कर कहीं और विश्राम करे। लेकिन वानर ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। क्रोधित होकर भीम ने वानर को युद्ध के लिए न्यौता दे दिया और कहा कि उससे युद्ध करो।

वानर ने भीम को पूंछ उठाने को कहा

वृद्ध वानर ने भीम से कहा कि वह युद्ध नहींं कर पाएगा। लेकिन अगर तुम्हें इतनी ही शीघ्रता हो रही है तो तुम मेरी पूंछ को हटाकर चले जाए। क्रोधित हुए भीम ने वानर की पूंछ को हटाने का प्रयास किया। लेकिन अपना पूरा बाहुबल लगाने के बाद भी वह उस वृद्ध वानर की पूंछ को हिला भी नहीं पाए। भीम समझ गए थे कि ये कोई साधारण वानर नहीं है। उसके बाद भीम वानर के आगे हाथ जोड़कर उनके समक्ष खड़े हो गए और अपनी भूल के लिए क्षमा मांगी।

हनुमान जी के समक्ष भीम ने स्वीकार की गलती

भीम के क्षमा मांगने के बाद वृद्ध वानर ने अपना असली रूप दिखाया और हनुमान जी प्रकट हुए। हनुमान जी को देखते हुए ही भीम अवाक् रह गए। तब जाकर भगवान हनुमान जी ने भीम को बताया कि आखिर उन्होंने क्यों उनका रास्ता रोका था। हनुमान जी ने भीम को बताया कि यह वन देवताओं का है। तुम्हें हर प्राणी से विनम्र से ही बात करनी चाहिए। हनुमान जी की बात सुनकर भीम ने अपनी गलती स्वीकार की।

भीम को मिला हनुमान जी से आर्शीवाद

भीम ने हनुमान जी से अनुरोध किया कि वह उन्हें अपना विराट रूप दिखाएं। भीम के कहने पर भगवान हनुमान जी ने उन्हें अपना विराट रूप दिखाया। हनुमान जी का विराट रूप देख भीम मंत्रमुग्ध हो गए। इसके बाद हनुमान जी ने भीम को कौरवों के खिलाफ युद्ध में विजयी होने का आर्शीवाद दिया। भगवान हनुमान ने भीम को गले लगाया जिससे उनकी शक्ति और भी बढ़ गई।

 

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