जब भगवान शिव ने विष्णु भगवान के पुत्रों का किया वध, दोनों के बीच हुआ भीषण युद्ध

भगवान शिव और विष्णु एक दूसरे को कितने प्रिय हैं यह सभी जानते हैं। लेकिन एक पौराणिक कथा के अनुसार भगवान शिव ने विष्णु भगवान के पुत्रों का वध कर दिया था। भगवान शिव को आखिर विष्णु भगवान के पुत्रों को क्यों मारना पड़ा। तो आईए आपको हम इस लेख में बताते हैं कि उस पौराणिक कथा के बारे में-

भगवान विष्णु सृष्टि के पालनहार हैं। वह लोगों पर आए दुखों को दूर करते हैं। जब भी लोग किसी विकट परिस्थिति में होते हैं तो वह भगवान विष्णु को ही याद करते हैं। यहां तक कि देवतागण भी जब सकंट में होते हैं तो वह उन्हें ही याद करते हैं। शिव पुराण के अनुसार की एक कथा के अनुसार भगवान शिव ने सृष्टि को बचाने के लिए विष्णु भगवान के पुत्रों का वध कर दिया। विष्णु भगवान के पुत्रों के वध करने के बाद भगवान शिव ने तीनों लोकों में एक बार फिर शांति लेकर आए।

शिव पुराण के अनुसार जब अमृत मंथन किया जा रहा था तब देवता और राक्षस दोनों ही इस अमृत को ग्रहण करना चाहते थे। इसलिए जब अमृत बांटने का समय आया तो भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण किया। मोहिनी रूप देखकर सभी राक्षस उन पर मोहित हो उठे। मोहिनी रूप से धारण कर भगवान विष्णु ने राक्षसों को अमृत ग्रहण करने से तो रोक दिया। यह देख राक्षस क्रोधित हो उठे और उन्होंने देवताओं के खिलाफ युद्ध आरंभ कर दिया। इस युद्ध में राक्षसों पर देवताओं की सेना हावी रही। युद्ध में खुद की पराजय होते देख राक्षस पाताल लोक की तरफ चले गए। भगवान विष्णु भी उनके लिए पीछे-पीछे चले गए।

भगवान विष्णु ने अप्सराओं से की शादी

भगवान विष्णु जब पीछे करता हुए पाताल लोक पहुंचे तो वहां सुंदर अप्सराएं थी। जिन्हें राक्षसों ने कैद करके रखा हुआ था। यह सभ अप्सराएं भगवान शिव की भक्त थी। भगवान विष्णु ने इन सभी अप्सराओं को राक्षसों से मुक्त करवा दिया। भगवान विष्णु को देख सभी अप्सराएं उन पर मोहित हो उठी। इसके बाद कठोर तक करके अप्सराओं ने भगवान शिव से वरदान मांग लिया कि भगवान विष्णु को अपने पति के रूप में देखना चाहती हैं। भगवान शिव ने अपनी भक्त अप्सराओं के वरदान को पूरा कर दिया और विष्णु को उनका पति बना दिया।

अप्सराओं के साथ पाताल लोक में रहे भगवान विष्णु

शिव पुराण के मुताबिक भगवान विष्णु भोलेनाथ की इस लीला को जानते थे। इसलिए भगवान विष्णु ने उन अप्सराओं के पति बने और उनके साथ कुछ समय तक पाताल लोक में ही रहे। जब भगवान विष्णु पाताल लोक में रहे तो उन अप्सराओं से भगवान विष्णु को पुत्रों की प्राप्ति हुई। इन पुत्रों में राक्षसी गुण थे। जैसे-जैसे यह अप्सराओं के यह पुत्र बड़े हुए तो उन्होंने चारों ओर हाहाकार मचा दिया। उनके उत्पात से तीनों लोक परेशान था। इन सभी से परेशान होकर सभी भगवान शिव के पास कैलाश पर्वत गए जहां देवताओं ने उनसे मदद मांगी।

भगवान शिव ने वृषभ अवतार धारण किया

तीनों लोकों में मचे उत्पात को खत्म करने के लिए भगवान शिव ने वृषभ यानि कि बैल का अवतार धारण किया। वृषभ अवतार में भगवान शिव पाताल लोक पहुंच गए। पाताल लोक में जाकर भगवान शिव ने विष्णु भगवान के अप्सराओं से उत्पन्न उन सभी पुत्रों को संहार कर दिया जिन्होंने तीनों लोकों में उत्पात मचा कर रखा हुआ था। पुत्रों की संहार का जब भगवान विष्णु को पता चला तो वह बहुत क्रोधित हो उठे।

भगवान विष्णु और शिव के बीच हुआ भीषण युद्ध

शिव पुराण के अनुसार जब पुत्रों की संहार की सूचना पाते ही भगवान विष्णु वृषभ से युद्ध करने के लिए पहुंच गए जो कि भगवान शिव का अवतार ही था। भगवान विष्णु और शिव के अवतार वृषभ के बीच भयंकर युद्ध हुआ। इस युद्ध में ना तो भगवान विष्णु पीछे हटने को तैयार थे और ना ही शिव के अवतार वृषभ। इसलिए इस युद्ध को देखते हुए अप्सराओं ने भगवान शिव से कहा कि वह भगवान विष्णु को वरदान से मुक्त कर दे। भगवान शिव ने अप्सारओं की इस प्रार्थना को स्वीकार कर लिया और विष्णु भगवान को वास्तविक रूप में ले आए। भगवान विष्णु को सभी चीजों का बोध हो गया था। उन्होंने भगवान शिव से आज्ञा मांगी और दोबारा विष्णु लोक चले गए।

 

 

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *