हनुमान जी को देखकर मोहित हो गई थी रावण की बेटी, बेहद दिलचस्प है यह कथा

रामायण में भगवान श्रीराम अपनी पत्नी सीता को बचाने के लिए श्रीलंका तक चले जाते हैं। इसमें भगवान श्रीराम का सहयोग उनके परम भक्त हनुमान जी करते हैं। हनुमान और भगवान श्रीराम को लेकर कई कथाएं हैं। लेकिन हम आपको आज उस कथा के बारे में बताने जा रहें हैं जिसे बेहद ही कम लोगों को पता है। यह कथा हनुमान जी के साथ जुड़ी हुई है। इस कथा में लंकापति रावण की सपुत्री का वर्णन भी देखने को मिलता है। तो आईए आपको बताते हैं उस कथा के बारे में-

रामायण को ऋषि वाल्मिकी जी ने लिखा। लेकिन रामायण के कई प्रारूप देखने को मिलते हैं। अगर हम दक्षिण भारत की तरफ जाएं तो वहां पर भी रामायण का जिक्र मिलता है लेकिन थोड़े बदलाव के साथ। क्योंकि हर जगह पर रामायण का रूप बदला गया है। दक्षिण भारत में भी कुछ ऐसा ही है। दक्षिण भारत में भी रामायण का जिक्र मिलता है लेकिन उनकी रामायण में भगवान श्रीराम के साथ लंकापति रावण का भी सम्मान देखने को मिलता है। वहीं थाईलैंड और कंबोडिया में भी रामायण की अलग अलग कहानियां सुनने को मिलती हैं। ऐसी ही एक कथा है जिसमें रावण की बेटी को हनुमान जी से प्यार हो जाता है।

कहा जाता है कि रावण की एक बेटी भी थी जिसका नाम सुवर्णमछा था। कई जगहों पर इसका सुवर्णमत्स्य भी देखने को मिलता है। कथा के अनुसार रावण की यह बेटी बेहद ही सुंदर और आर्कषक थी। सुवर्णमछा को सोने की जलपरी कहा गया है। सुवर्णमछा का शरीर रावण की सोने की लंका की तरह ही चमकता था। सुवर्णमछा को कंबोडिया और थाईलैंड में पूजा जाता है। इसे बेहद ही शुभ माना जाता है।

कथा के अनुसार जब रामसेतु बांध बनाया जा रहा था। तब रावण ने अपनी इस बेटी को ही बांध के कार्य को विफल बनाने के लिए भेजा था। सुवर्णमछा ने रामसेतु बांध को विफल करने के लिए कई प्रयास किए लेकिन वह सैदव इसमें विफल रही। इसी दौरान जब सुवर्णमछा ने हनुमान जी को देखा तो उन पर मोहित हो गई। वह इस हनुमान जी पर मोहित हो गई थी कि रावण द्वारा दिया गया कार्य भूल गई थी। वह हनुमान जी से प्रेम करने लगी।

जब हनुमान जी पहली बार पत्थरों को समुद्र में डालते हैं तो वह डूबने लगते हैं और गायब भी होने लगते हैं। हनुमान जी का इस पर ध्यान गया। इसके पीछे का कारण जानने के लिए हनुमान जी सुमद्र में चले जाते हैं कि आखिर यह पत्थर कहां गायब हो रहे हैं। हनुमान जी ने समुद्र में देखा कि कुछ जलजीव पत्थरों को निकाल कर दूसरी जगह रख रहें हैं। वह यह सब रावण की बेटी सवर्णमछा के कहने पर कर रहे थे।

हनुमान जी ने जलकन्या को युद्ध करने की चुनौती दी। लेकिन हनुमान जी के युद्ध की चुनौती देने पर सवर्णमछा उनके प्यार में पड़ जाती हैं। हनुमान जी यह सब जान जाते हैं कि यह जल कन्या उन पर मोहित हो गई है। वह जलकन्या को समुद्र से ऊपर ले आते हैं। तब वह उससे उसका परिचय पूछते हैं? तो फिर सवर्णमछा अपना परिचय देते हुए कहती है कि वह रावण की पुत्री सवर्णमछा है। उसे उसके पिता रावण ने यहां पर आपके कार्य में बाधा डालने के लिए भेजा है। हनुमान जी फिर सवर्णमछा को समझाते हैं कि देवी तुम यह बहुत गलत कार्य कर रही हो। क्योंकि वह हनुमान जी से प्रेम करने लगी थी तो वह उनकी बातें मान जाती है और जितने भी पत्थर जल जीवों ने चुराए हुए थे। एक कथा यह भी देखने को मिलती है कि सवर्णमछा एक पुत्र को जन्म देती है जिसका नाम मैकचनू रखा। इसे उन्होंने भगवान हनुमान जी का अंश बताया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *