जानिए बलराम और हल की कथा, कैसे पड़ा हलधर नाम

भगवान श्रीकृष्ण और बलराम दोनों युद्ध में माहिर थे। लेकिन जहां कृष्ण ने सुदर्शन चक्र को अपना हथियार बनाया तो वहीं बलराम यानि की कृष्ण के बलदाऊ भैया ने गदा और हल को अपना हथियार बनाया। बलराम गदा युद्ध में बहुत निपुण थे। उन्होंने गदा युद्ध में हर वह चीज देखी जो एक योद्धा को चाहिए। लेकिन बलराम ने गदा को छोड़कर हल को अपना हथियार बनाया। हल जो किसानों का प्रतीक है। उस बलराम ने बतौर एक शस्त्र इस्तेमाल किया और इससे कई युद्ध भी जीते। कई कथाओं के कारण यही कारण है कि किसानों के सबसे बड़े भगवान बलराम हैं। आईए आपको बताते हैं कि बलराम और उनके हल धारण करने के कुछ रोचक किस्से-

बलराम बहुत ही ताकतवर थे। उनके बाजुओं में काफी जोर था जिस वजह से वह भारी से भारी वस्तु को अपने हाथों से उठा लेते थे। जिस हल को किसान अपने खेत जोतने के लिए इस्तेमाल करता है बलराम ने उसे अपना शस्त्र बना लिया। बलराम ने गदा के साथ-साथ हल को भी अपने शत्र के रूप में प्रयोग किया। बलराम का यह हल काफी भारी और दिव्य था। इसे उठा पाना किसी आम शख्स के लिए मुमकिन नहीं था।

हल रखने के कारण हलधर नाम पड़ा

बलराम को तो कई नामों से जाना जाता है। बलराम के छोटे भाई कृष्ण बलराम को दाऊ, बलभद्र, संकर्षण और बलदाऊ कह कर पुकारा करते थे। लेकिन जब से बलराम ने हल को अपने शस्त्र के रूप में धारण किया तो उन्हें एक नाम मिला। उन्हें हल धारण करने की वजह से हलधर नाम रखा। वह इसे हमेशा अपने साथ रखते थे। बड़े से बड़ा शत्रु उनसे युद्ध करने से भयभीत हो जाता था। बलराम का मुख्य शस्त्र भी हल को बना लिया।

शेषनाग के अवतार थे बलराम

बलराम श्रीकृष्ण से बड़े थे। श्रीकृष्ण जहां विष्णु भगवान के अवतार थे तो वहीं बलराम शेषनाग के अवतार थे। इसके पीछे कथा है कि एक दिन शेष नाग ने विष्णु भगवान से कहा कि वह बड़े भाई बनते हैं जिस कारण सभी का वह प्रेम पाते हैं। इस बार वह उनके बड़े भाई बनेंगे। विष्णु भगवान इसके लिए मान गए। लेकिन श्रीकृष्ण के जन्म के बाद सभी बलराम को कम कृष्ण को अधिक प्रेम करते। बलराम का जन्मोत्सव भाद्रपद की कृष्ण पक्ष की षष्ठी को मनाया जाता है।

जब हल से हस्तिनापुर को डुबोने का प्रयास किया

एक कथा के अनुसार कौरवों ने बलराम और कृष्ण को खेल का आमंत्रण दिया। इस खेल में बलराम कौरवों से जीत गए लेकिन कौरवों में सबसे बड़े दुर्योधन ने यह मानने से मना कर दिया। इससे बलरा काफी क्रोधित हो उठे। गुस्से में बलराम ने अपने हल से भूमि को दो हिस्सों में फाड़ दिया और पूरे हस्तिनापुर को उसमें डुबोने का प्रयास किया। तब आसमान से आकाशवाणी हुई की कि बलराम ही विजयी हुए हैं। इसके बाद ही बलराम का गुस्सा शांत हुआ। इसीसे वह पूरे संसार में हलधर के नाम से प्रसिद्ध हुए।

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