जानिए कैसे बाबा रामदेव की 100 करोड़ की पतंजलि बनी 26 हजार करोड़ की कंपनी

योग गुरू बाबा रामदेव अक्सर अपने बयानों के कारण विवादों में फंसते नजर आते है। वह कई बार अपने बयानों से सुर्खियों में बने रहते हैं। लेकिन कम ही लोगों को पता है कि बाबा रामदेव की बिजनेस भी लगातार उनके इस बयानों के कारण चर्चा में रहता है। हाल ही के एक रिपोर्ट के अनुसार रामदेव की पतंजलि कंपनी ने इस साल जहां पूरे देश में मंदी है वहीं उनकी कंपनी ने 26 हजार करोड़ रूपए का रेवेन्यू जुटाया है। कोरोना महामारी के दौरान बाबा रामदेव की कंपनी ने 400 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।

कैसे शुरू हुई कंपनी

बाबा रामदेव का जन्म 1968 में हरियाणा के सैदालीपुर में हुआ। पिता राम निवास यादव और गुलाबो देवी ने अपने बेटे का नाम रामकिशन रखा। लेकिन बचपन में ही इन्हें लकवा मार गया जिससे उनके शरीर का बायां हिस्सा निष्क्रिय हो गया। इसके बाद उन्होंने उपचार के लिए योग का सहारा लिया जिससे उन्हें काफी लाभ हुआ। इसके बाद उन्होंने योग करने का शुरू किया। योग के दौरान उनकी मुलाकात गुजरात के बिजनेस मैन जिवराज भाई पटेल से हुई। इन्ही के जरिए वो सूरत गए और पहला कैंप 200 लोगों के साथ लगाया।

साल 1995 में गुजरात के बिजनेस मैन जिवराज ने बाबा रामदेव को 3.5 लाख रूपए दान दिए। इसी के साथ उन्हें कई अन्य लोगों ने 1.5 लाख रूपए का दान दिया। लोगों द्वारा मिले इस दान से बाबा रामदेव ने दिव्य योग ट्रस्ट की शुरूआत की। इसका पहला अस्पताल हरिद्वार में शुरू किया गया।

टीवी की दुनिया में रखा कदम

बाबा रामदेव ने साल 2001 में टीवी की दुनिया में कदम रखा। उनका योग का कार्यक्रम संस्कार चैनल पर आने लगा। यही उनकी जिंदगी का टर्निंग प्वाइंट था। इसे उनकी प्रसद्धि भारत में बढ़ गई। इसके बाद उनके लगातार योग के कार्यक्रम टीवी के अन्य चैनलों पर आने लगा। बाबा रामदेव ने टीवी के दो बड़े चैनल आस्था और संस्कार के मलिकाना अधिकार ले लिए। धीरे-धीरे बाबा रामदेव टीवी जगत में विज्ञापन पर भी दिखाई देने लगे। जिससे उन्हें और भी प्रसद्धि दी।

साल 2007 योगपीठ की शुरूआत

साल 2007 में बाबा रामदेव ने पतंजलि योगपीठ की स्थापना की। इस योगपीठ की स्थापना के समय 15 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने अपनी हाजिरी लगवाई थी और यहीं से रामदेव की राजनीति में दखलअंदाजी शुरू हुई। साल 2009 में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड कंपनी की शुरूआत की। इस कंपनी के आने से भारत की अन्य कंपनियों में हड़कंप मचा दिया। पतंजलि ने अपनी शुरूआत 50 प्रोडक्ट के साथ की जो अब 500 तक पहुंच चुका है।

2007 में रामदेव ने पतंजलि योगपीठ की शुरुआत की। इस इवेंट में 15 मुख्यमंत्री आए थे। FMCG सेक्टर में पतंजलि आयुर्वेद लिमिटेड 2009 में शुरू हुई। इसने हिंदुस्तान यूनिलिवर, नेस्ले और डाबर जैसी स्थापित कंपनियों में खलबली मचा दी। रामदेव ने 50 प्रोडक्ट के साथ शुरुआत की थी जो अब करीब 500 प्रोडक्ट तक पहुंच चुका है। 3 साल के अंदर ही कंपनी का सलाना टर्नओवर 450 करोड़ रूपए तक पहुंच गया।

राजनीति में दखल

बाबा रामदेव की मोदी से नजदीकियां गुजरात के मुख्यमंत्री रहते काफी बढ़ी। रामदेव ने साल 2012 में गुजरात के विधानसभा चुनाव के दौरान मोदी के लिए प्रचार भी किया। जब मोदी प्रधानमंत्री बनन के उम्मीदवार बने तो रामदेव ने जोरो शोरो से उनका समर्थन किया और उनके गुजरात मॉडल की तारीफ की। रामदेव ने विपक्षी पार्टियों के खिलाफ कालेधन का मुद्दा उठाया जो मोदी के लिए काफी लाभकारी सिद्ध हुआ। उन्होंने मोदी के साथ कई रैलियों में भी गए।

लेकिन साल 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद बाबा रामदेव की कंपनी ने काफी तेज रफ्तार पकड़ी और 2016 में कंपनी का टर्नओवर 5 हजार करोड़ रूपए तक पहुंच गया। मात्र 4 साल में ही कंपनी ने 11 गुना तरक्की की। मोदी सरकार में देखते ही देखते इस कंपनी का मुनाफा बढ़ता ही गया। साल 2020 और 21 में कोरोना महामारी के दौरान दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई थी लेकिन रामदेव की कंपनी ने मुनाफा कमाया। आज इस कंपनी 26 हजार करोड़ की हो गई है।

मोदी सरकार ने पतंजलि को दी छूट

केंद्र में मोदी सरकार आने के कारण रामदेव से जुड़ी कई संस्थाओं को आय सर्विस टैक्स से बाहर कर दिया जिसका फायदा कंपनी को हुआ। साल 2017 में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक मोदी सरकार के आने के बाद राज्य सरकारों ने पतंजलि को लैंड डील में 336 करोड़ रूपए की छूट दी। पतंजलि ने करीब 2 हजार करोड़ एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर रखा है।

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