गरुड़ कैसे बने भगवान विष्णु की सवारी, जुड़ी है बेहद रोचक कहानी

भगवान विष्णु और उनकी सवारी गरुड़ के बारे में तो सभी जानते हैं। लेकिन पक्षियों के महाराजा गरुड़ कैसे भगवान विष्णु जी की सवारी बने। इसके बारे में कम ही लोगों को पता है। आज हम अपने इस लेख में बताएंगे कि भगवान विष्णु और गरुड़ की कथा। कैसे गरुड़ भगवान विष्णु जी की सवारी बने और कैसे भगवान विष्णु ने उन्हें अपने ऊपर भी रखा। तो आईए बताते हैं कि भगवान विष्णु और गरूड़ भगवान कथा –

गरूड़ जी की निस्वार्थ सेवा से प्रसन्न हुए विष्णु भगवान

एक बार पक्षियों के महाराजा गरुड़ अपनी चोंच में अमृत लेकर आसमान में जा कहीं जा रहे थे। यह अमृत वह किसी और के लिए लेकर जा रहे थे। इसके साथ ही गरुड़ जी को कहा गया कि वह इस अमृत को पीएंगे नहीं। गरुड़ जी ने बिल्कुल ठीक वह ऐसा ही किया और अमृत लेकर आसमान की ऊंचाईयों में चले। गरुड़ जी का यह निस्वार्थ भाव देकर भगवान विष्णु बेहद प्रसन्न हो गए। विष्णु भगवान ने तब जाकर गरुड़ जी से मिलने की इच्छा की और उनसे मिलने चले गए।

भगवान विष्णु ने वर मांगने के लिए कहा

गरुड़ जी आसमान में अमृत को अपनी चोंच में लेकर जा रहे थे कि तभी भगवान विष्णु उनके सामने प्रकट हो गए। भगवान विष्णु जी को देखकर गरुड़ जी आश्चर्यचकित रह गए। गरुड़ जी ने भगवान विष्णु को देखकर वहीं रूक गए और उन्हें प्रणाम किया। गरुड़ जी ने भगवान विष्णु से पूछा कि हे प्रभु आप मेरे समक्ष आए यह मेरे लिए बहुत ही सम्मान की बात है। मैं आपके लिए क्या कर सकता हूं प्रभु। इस पर भगवान विष्णु जी ने गरुड़ को कहते हैं कि मैं तुम्हारी निस्वार्थ भाव से काफी प्रसन्न हूं। मैं तुम्हें वर देता हूं जो तुम चाहो तुम्हे मिलेगा।

सदैव विष्णु के ध्व्ज पर होने का वरदान मांगा

जब विष्णु जी ने गरुड़ जी को वर मांगने के लिए कहा तो गरुड़ जी ने कहा कि हे प्रभु! मैं चाहता हूं कि मैं सदैव आपके रथ के ध्व्ज की शान बना रहा हूं। भगवान विष्णु जी ने गरुड़ जी के इस वर को पूरा किया। इसके साथ ही भगवान विष्णु जी ने गरुड़ जी को अमर होने का वरदान भी दे दिया। क्योंकि अगर गरुड़ चाहते तो अमृत पीकर अमर हो सकते थे। लेकिन उन्होंने खुद से पहले दूसरों के बारे में सोचा।

ऐसे बने भगवान विष्णु की सवारी

कई कथाओं में यह कहा गया है कि भगवान विष्णु जी ने गरुड़ से कहा कि वह उनकी सवारी बनें। जिसके जवाब में प्रसन्न होकर गरुड़ जी इसे स्वीकार कर लेते हैं और उनकी सवारी बनते हैं। वहीं कुछ कथाओं में यह कहा गया है कि गरुड़ ने विष्णु भगवान से कहा कि वह उन्हें अपनी सवारी बनाकर उनके जीवन को सफल बनाए।

तो इस तरह से भगवान पक्षी राज गरुड़ जी भगवान विष्णु की सवारी बने। गरुड़ जी को अमर होने का वरदान है और वह सैदव इस संसार में रहेंगे।

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