भगवान श्रीकृष्ण की मृत्यु कैसे हुई, उन्हें किसने मारा, जानें क्या है पूरी पौराणिक कथा

भगवान श्रीकृष्ण अपनी लीलाओं के लिए जाने जाते हैं। भगवान श्रीकृष्ण ने मानव समाज में रहने का तरीका बताया और कर्म करने के लिए प्रेरित किया। भगवान श्रीकृष्ण की कई कथाएं हैं। लेकिन बहुत से लोगों को यह नहींं पता है कि क्या कृष्ण भगवान ने खुद समाधि ली थी या फिर उनकी मृत्यु हुई थी। अगर उनकी मृत्यु हुई तो कैसे हुई? आईए आपको बताते हैं भगवान श्रीकृष्ण ने कैसे पृथ्वी लोक को त्यागा।

भगवान श्रीकृष्ण का जन्म तो मथुरा में हुआ। लेकिन उन्होंने अपना पूरा बचपन गोकुल, वृंदावन और बरसाना में व्यतीत किया। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने मथुरा को छोड़कर द्वारिका में शासन किया। महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण अर्जुन के सारथी बने और उन्हें गीता का उपदेश दिया। महाभारत के बाद कृष्ण भगवान द्वारिका में करीबन 36 साल तक रहे। यहां अपनी पत्नियों के साथ उन्होंने मानवों के कल्याण के लिए कई काम किए।

एक पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान श्रीकृष्ण पांडवों के साथ हस्तिनापुर गए। वहां पर अपने सभी पुत्रों को खो चुकी गंधारी ने श्राप दे दिया कि जैसे तुमने मेरे वंश को खत्म किया है। उसी तरह तुम्हारा वंश भी आपस में लड़कर खत्म हो जाएगा। भगवान श्रीकृष्ण इससे पहले ही जानते थे कि उन्हें माता गंधारी से ऐसा श्राप मिलेगा और ऐसा ही हुआ।

एक बार सभी युदवंशी यदु त्योहार के लिए एकत्रित हुए। वहां सभी यदुवंशियों ने खूब मदीरा का सेवन कर लिया और एक दूसरे को मारने लगे। भगवान श्रीकृष्ण वहीं पर मौजूद थे और यह सब देख रहे थे। उन्हें माता गंधारी का वह श्राप याद आ गया। भगवान श्रीकृष्ण ने उस जगह से भाग जाना उचित समझा।

भगवान श्रीकृष्ण ने अपने साथ कई लोगों को भी ले गए। श्रीकृष्ण भगवान ने द्वारिका नगरी को छोड़ दिया हस्तिनापुर में जाकर शरण ली। एक दिन भगवान श्रीकृष्ण वन में गए हुए थे। उसी दौरान जरा नाम का एक शिकारी वहां पर शिकार करने आया हुआ था। जरा ने भगवान श्रीकृष्ण को हिरण समझकर बाण मार दिया और यह बाण सीधा भगवान श्रीकृष्ण के पांव में जाकर लगा। भगवान ने उस समय पृथ्वी लोक छोड़ने का निर्णय किया और अपना शरीर त्याग दिया।

जिस शिकारी जरा ने भगवान श्रीकृष्ण को बाण मारा था वह काफी व्याकुल हो गया। उसने सोचा की भगवान की मौत उसी के बाण की वजह से हुई है जिस कारण उसने समुद्र में जाकर आपने प्राण त्याग दिए। यह जरा कोई और नहीं बाली था। जिसे पिछले जन्म में भगवान श्रीराम ने छुपकर तीर मारा था। भगवान ने ठीक उसी तरह अपने प्राण त्यागे जिस तरह बाली ने त्यागा था।

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