ताज होटल बना दुनिया का सबसे भरोसेमंद होटल, जानें इसका रोचक इतिहास

ताज होटल आज भारत की शान बन चुका है। कोई अगर विदेशी हस्ती भारत में आता है तो वह मुंबई के ताज होटल में एक बार जरूर आता है। लेकिन हाल ही में ताज होटल ने पूरी दुनिया में अपनी पहचान के साथ साथ भारत का भी मान सम्मान बढ़ाया। एक रिपोर्ट के अनुसार ताज होटल दुनिया का सबसे भरोसेमंद और मजबूत होटल के ब्रैंड होने का गौरव हासिल हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक कहा गया है कि ताज होटल ने कोरोना महामारी के दौरान जिन चुनौतियों का सामना किया और जिस तरह से उन्होंने काम किया। इस कारण वह होटलों की ब्रैंड लिस्ट में सबसे ऊपरी क्रम में खड़े हुए दिखाई दिए।

इस गौरवशाली की जानकारी टाटा समूह ने दी। टाटा समूह ने इसकी जानकारी लोगों के साथ साझा की और लोगों को इस बारे में बताया। यह पहली बार नहीं है कि जब किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टाटा ने देश का सम्मान बढ़ाया हो। इससे पहले साल 2016 में टाटा होटल समूह इस लिस्ट में 38वें स्थान पर पहुंच कर रिकॉर्ड बनाया था। जो रिपोर्ट जो जारी हुई है उसके अनुसार दुनिया के 100 सबसे बड़े होटल्स समूह में 29.6 करोड़ डॉलर की ब्रैंड वैल्यू वाला ताज समूह इस लिस्ट का सबसे मजबूत होटल बनकर ऊभरा। ताज होटल की रैंकिग सभी होटलों में सबसे अधिक 89.3 रही।

ताज होटल का है गौरवशाली इतिहास

ताज होटल आज पूरी दुनिया में अलग पहचान बना चुका है। भारत की तरक्की को ताज होटल ने बेहद बारीकी से देखा है। यहां तक कि आजादी की लड़ाईयों को भी ताज ने खुद देखा। साल 2008 में पाकिस्तानी आंतकियों द्वारा अपने ऊपर हमला भी देख चुका है मुंबई का ताज होटल। ताज होटल को टाटा समूह के संस्थापक जमेशदजी टाटा ने बनवाया था।

अंग्रेजों से बदला लेने के लिए बनाया महल जैसा होटल

भारत और मुंबई की शान बन चुका ताज होटल को टाटा समूह के संस्थापक जमशेदजी टाटा ने साल 1903 में बनाया था। इसे बनवाने के पीछे अंग्रेजों से बेईज्जती का बदला लेने का था। दरअसल जमशेदजी टाटा एक बार इंग्लैंड के दौरे पर गए हुए थे। वहां पर उन्हें उनके एक मित्र ने बुलाया था जोकि विदेशी मूल का था। लेकिन जब जमेशद जी टाटा उस होटल में पहुंचे तो होटल के मैनजेर ने जमेशद जी को यह कहते हुए बाहर जाने के लिए कहा कि इस होटल में भारतीयों को आने की इजाजत नहीं है। उस मैनजेर के शब्द थे इंडियंस नॉट अलॉउड इन दिस होटेल। बस फिर क्या था। जमशेद टाटा को यह अपमान खुद की नहीं बल्कि उनके देश भारत की लगी। जमशेद टाटा इस कहां चुप रहने वाले थे। उन्होंने इस अपमान का बदला लेने की ठान ली।

दुनिया का आर्कषण केंद्र

जमशेद टाटा ने निर्णय किया कि वह भारत में ऐसा होटल बनाएंगे जो पूरी दुनिया का आर्कषण का केंद्र बनेगा। जमशेद टाटा होटल बनाने के निश्चय से इंग्लैंड से भारत आ गए। जमशेद टाटा ने मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया के सामने ताज होटल समूह के पहले होटल का निर्माण करवाया। इसे गेटवे ऑफ इंडिया के सामने बनाने का एक यह भी मकसद था कि लोग भारत की सुंदरता को देख सके। आज दुनिया के सभी लोग एक बार ताज होटल में जरूर रूकना चाहते हैं।

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