दुर्योधन की जिंदगी के 10 अनसुने किस्से, जो शायद ही आपको पता हों

महाभारत के कई पात्र हैं। उनमें से एक पात्र है धृतराष्ट्र और गंधारी का सबसे बड़ा पुत्र दुर्योधन। गंधारी के एक वरदान स्वरूप 100 पुत्र हुए थे और उन 100 पुत्रों में सबसे बड़े पुत्र का नाम ही दुर्योधन था। दुर्योधन हठी किस्म का था। लेकिन दुर्योधन को अंहकार और राजपाठ का लालच उसके मामा और गंधारी के भाई शकुनि ने सिखाया। शकुनिन ने दुर्योधन को अपने वश में इस कद्र कर लिया था कि वह हमेशा उनकी बात को मानता। मामा शकुनि की बातों में आकर ही दुर्योधन लोभी, हठी और अंहकारी बन गया। उसके मृत्यु का कारण भी यही था। आईए आपको बताते हैं दुर्योधन के 10 बातों के बारे में जो आपको पहले नही पता होंगी।

1. कहा जाता है कि दुर्योधन का जन्म गंधारी को मिले 100 घड़ों में से पहला जो घड़ा टूटा था उससे हुआ था। जब दुर्योधन का जन्म हुआ तो आसमान में काले बादल आ गए और बिजली कड़कने लगी और इसके साथ ही जन्म के साथ बोलने भी लगा था। दुर्योधन के जन्म के समय चारों ओर से पक्षियों और जानवरों के चिल्लाने की आवाज आने लगी थी। तभी विदुर ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए महाराज धृतराष्ट्र को कहा कि यह बालक ही हस्तिनापुर के विनाश का कारण बनेगा। विदुर ने महाराज धृतराष्ट्र से कहा कि आप इस बालक को त्याग दें इसमें ही सभी की भलाई है लेकिन धृतराष्ट्र ने विदुर की बात को मानने से इंकार कर दिया।

2. एक कथा के अनुसार दुर्योधन के जन्म को ही कलयुग का अवतार माना गया है क्योंकि दुर्योधन में वह सब चीजे शामिल थी जो कलयुग में आने वाले मनुष्यों में होनी चाहिए थी। उसने स्त्री के अपमान से लेकर बेईमानी तक हर वह कार्य किया जो एक कलयुगी मनुष्य आज के समय में कर रहा है। यही कारण है कि उसे कलयुग का अवतार माना गया। लेकिन इसका उल्लेख बहुत ही कम जगहों पर मिलता है।

3. दुर्योधन भले ही बेईमानी में करने में तेज था। लेकिन उसने युद्ध हमेशा ईमानदारी से किया। दुर्योधन उस समय के महान गदा धारियों में से एक था। यहां तक कि उसे गदा युद्ध में भीम भी नहीं हरा पाया था। दुर्योधन ने यह गदा युद्ध श्रीकृष्ण के बड़े भाई बलराम से सीखी। वह इस गदा युद्ध में काफी निपुण हो गया था। यही कारण है कि वह बलराम का चहेता शिष्य भी बन गया था। अगर भीम अंतिम युद्ध में दुर्योधन से बेईमानी ना करते तो वह कभी नहीं जीत पाते और ना ही अपनी सौगंध पूरी कर पाते।

4. जब महाभारत का युद्ध समाप्त होने वाला था तब दुर्योधन की माता गंधारी ने अपनी शक्तियों का इस्तेमाल किया। अपने 99 पुत्रों को युद्ध में गंवा चुकी गंधारी दुर्योधन को नहीं गंवाना चाहती थी। इसलिए गंधारी ने दुर्योधन को उनके समक्ष नग्न आने के लिए कहा। जब दुर्योधन नग्न अवस्था में अपनी मां मिलने जा रहे थे तब श्री कृष्णी ने दुर्योधन को कहा कि तुम इस अवस्था में अपनी मां से कैसे मिल सकते हो। तुम्हें शर्म नहीं आती। श्रीकृष्ण की बातें सुनकर दुर्योधन सोच में पड़ गया। फिर वह अपनी जंघा से नीचे पत्ते पहन कर चला गया। जब गंधारी ने अपनी आंखों से पट्टी हटाई और दुर्योधन के पूरे शरीर को वज्र का बनाना चाहा तो सिर्फ उसके कमर का ऊपरी हिस्सा ही बन पाया। यह देख गंधारी गुस्सा हो गई। इसलिए दुर्योधन का आधा शरीर वज्र का बन गया था।

5. महाभारत के युद्ध की समाप्ती दुर्योधन के युद्ध से हुई। महाभारत का यह युद्ध 18 दिनों तक चला। इस युद्ध में 18 सेनाएं लड़ी थी। जिसमें 11 सेनाएं कौरवों और 7 सेनाएं पांडवों के लिए युद्ध किया था। भीम ने दुर्योधन की जंघा को तोड़कर ही उसका वध किया। चूंकि गदा युद्ध में कमर से नीचे नहीं वार कर सकते इसलिए बलराम ने भीम के खिलाफ शस्त्र उठाने तक का निर्णय कर लिया था। लेकिन फिर श्रीकृष्ण ने बताया कि इसी जंघा को लेकर भीम ने कसम खाई थी कि वह उसकी जंघा तोड़कर अपना बदला पूरा करेगा।

6. दुर्योधन भले ही श्रीकृष्ण को पसंद नहीं करता था। लेकिन उसकी पुत्री का विवाह श्रीकृष्ण के पुत्र सांब से ही हुआ था। इस लिहाज से वह श्रीकृष्ण का समधी था। लेकिन श्रीकृष्ण का सिर्फ दुर्योधन से ही नहीं बल्कि पांडवों से भी रिश्ता था। पांडव कुंती के पुत्र थे और कुंती श्रीकृष्ण की बुआ थी। अर्जुन ने श्रीकृष्ण की बहन सुभद्रा से विवाह किया था। इन दोनों का ही पुत्र था वीर अभिमन्यु।

7. दुर्योधन ने पांडवों को कई बार मारने का षडयंत्र रचा लेकिन वह हर बार असफल रहा। उसने सबसे पहले भीम की खीर में जहर देकर मारना चाहा लेकिन भीम बच गए। फिर दुर्योधन ने पांडवों को मारने के लिए एक और षडयंत्र रचा। वारणावत के लाक्ष्यागृह में पांडवों को जिंदा जलाकर मारना चाहा। लेकिन विदुर के बताए ज्ञान का फायदा उठाकर पांडव बच निकले।

8. जब महाभारत का युद्ध तय हो गया था तो श्रीकृष्ण ने यह तय किया था वह युद्ध नहीं करेंगे। इसके लिए अर्जुन और दुर्योधन श्रीकृष्ण से मदद मांगने द्वारिका पहुंचे। जब दोनों पहुंचे तो श्रीकृष्ण नींद की अवस्था में थे। दुर्योधन श्रीकृष्ण के सिर के पास कर खड़े हो गए। वहीं अर्जुन श्रीकृष्ण के पांव के समीप आकर बैठ गए। जब श्रीकृष्ण की नींद खुली तो उन्होंने अर्जुन के देखा। लेकिन उस जगह पर पहले दुर्योधन आए थे। श्रीकृष्ण ने फिर पहले अर्जुन को अवसर दिया कि वह उनसे क्या मांगने आए हैं। तो अर्जुन ने श्रीकृष्ण को बतौर अपना सारथी बनने के लिए कहा। इसके लिए वह मान गए। जब दुर्योधन का अवसर आया तो उन्होंने भगवान का नारायणी सेना मांग ली।

9. बहुत ही कम लोगों को पता होगा कि दुर्योधन की पत्नी का नाम भानुमति था। भानुमति भी दुर्योधन की तरह ही युद्ध करने में काफी अच्छी थी। दुर्योधन ने भानुमति को हरण किया था। लेकिन बाद में भानुमति को दुर्योधन से प्यार करने लगी थी। दोनों ही एक दूसरे के साथ युद्ध करते जिसमें भानुमति दुर्योधन को पराजित भी कर देती थी।

10. दुर्योधन और 100 कौरवों की एक बहन भी थी। उसका नाम दुशाला था। दुशाला का विवाह सिंधु नरेश जयद्रथ से हुआ था। जयद्रथ ने भी महाभारत के युद्ध में भाग लिया था। जयद्रथ को उसके पिता ने वरदान दिया था जिसके द्वारा उसके शरीर वध होकर नीचे गिरेगा वह भी उसी क्षण मर जाएगा। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को कहा कि एक ऐसा बाण मारना की इसका सिर दूर किसी के झोली में गिरे। ऐसे जयद्रथ का वध हुआ था।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *